GK Quiz In Hindi: भारत के इतिहास में जब भी सत्य और अहिंसा की चर्चा होती है, तो सबसे पहले महात्मा गांधी का नाम सामने आता है। उन्होंने न केवल भारत को स्वतंत्रता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि पूरी दुनिया को शांति, सहनशीलता और मानवता का मार्ग भी दिखाया। यही कारण है कि आज भी सरकारी नौकरी, प्रतियोगी परीक्षाओं और GK Quiz In Hindi में महात्मा गांधी से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।
महात्मा गांधी के जीवन से संबंधित एक सामान्य लेकिन महत्वपूर्ण प्रश्न है – महात्मा गांधी किस जाति के थे? यह सवाल खास तौर पर UPSC, SSC, रेलवे, पुलिस, शिक्षक भर्ती और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए बेहद उपयोगी है।
हालाँकि गांधी जी स्वयं कभी भी जाति व्यवस्था के समर्थक नहीं रहे, लेकिन ऐतिहासिक और शैक्षणिक दृष्टि से उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि को जानना General Knowledge का हिस्सा माना जाता है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि महात्मा गांधी किस जाति और समुदाय से थे, साथ ही उनके परिवार और प्रारंभिक जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ भी साझा करेंगे।
महात्मा गांधी किस जाति के थे?
महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। ऐतिहासिक अभिलेखों और उनकी आत्मकथा “सत्य के प्रयोग” के अनुसार, महात्मा गांधी एक हिंदू मोध बनिया (Modh Bania) परिवार से संबंध रखते थे।
हिंदू सामाजिक व्यवस्था के अनुसार, मोध बनिया समुदाय को वैश्य (Vaishya) वर्ण में रखा जाता है। वैश्य वर्ग का पारंपरिक कार्य व्यापार और वाणिज्य से जुड़ा होता है। “गांधी” उपनाम का संबंध भी पारंपरिक रूप से व्यापार से माना जाता है, जिसका अर्थ पंसारी या सुगंधित वस्तुओं का व्यापार करने वाला होता है।
पोरबंदर और बाद में राजकोट रियासत में गांधी जी का परिवार एक प्रतिष्ठित और सम्मानित परिवार माना जाता था। उनके पिता करमचंद गांधी, जिन्हें लोग सम्मानपूर्वक कबा गांधी कहते थे, पोरबंदर और राजकोट रियासत में दीवान (प्रधान मंत्री जैसे प्रशासनिक पद) पर कार्यरत थे। महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था।
उनके परिवार में धार्मिक मूल्यों और प्रशासनिक अनुभव का गहरा प्रभाव था, जिसने गांधी जी के चरित्र और विचारधारा को बचपन से ही मजबूत आधार प्रदान किया।
महात्मा गांधी के परिवार और जाति का महत्व
महात्मा गांधी का परिवार वैष्णव परंपरा से जुड़ा हुआ था। उनकी माता पुतलीबाई अत्यंत धार्मिक, संयमी और नैतिक मूल्यों वाली महिला थीं। उनके जीवन का गांधी जी पर गहरा प्रभाव पड़ा, जिसका प्रतिबिंब आगे चलकर उनके अहिंसा, सत्य और आत्मसंयम के सिद्धांतों में दिखाई देता है।
हालाँकि गांधी जी जन्म से वैश्य वर्ग से थे, लेकिन उनके परिवार की भूमिका केवल व्यापार तक सीमित नहीं थी। उनके पिता और दादा दोनों ही प्रशासनिक सेवाओं में उच्च पदों पर कार्य कर चुके थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि गांधी जी का पालन-पोषण एक अनुशासित, शिक्षित और जिम्मेदार वातावरण में हुआ।
गांधी जी ने अपने पूरे जीवन में जाति व्यवस्था की बुराइयों, विशेष रूप से छुआछूत के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई। उन्होंने दलित वर्ग को “अछूत” कहे जाने का विरोध किया और उन्हें ‘हरिजन’ यानी भगवान के लोग कहा। उनका उद्देश्य समाज में समानता और भाईचारे की भावना को मजबूत करना था।
यही कारण है कि गांधी जी की पहचान केवल किसी एक जाति तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे पूरे राष्ट्र और मानवता के नेता बन गए।
महात्मा गांधी से जुड़े महत्वपूर्ण GK प्रश्न (GK Quiz In Hindi)
प्रश्न: महात्मा गांधी का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर: पोरबंदर, गुजरात
प्रश्न: महात्मा गांधी के राजनीतिक गुरु कौन थे?
उत्तर: गोपाल कृष्ण गोखले
प्रश्न: महात्मा गांधी को “महात्मा” की उपाधि किसने दी?
उत्तर: रवींद्रनाथ टैगोर
प्रश्न: साबरमती आश्रम की स्थापना कब हुई थी?
उत्तर: वर्ष 1917
प्रश्न: “करो या मरो” का नारा किस आंदोलन से जुड़ा है?
उत्तर: भारत छोड़ो आंदोलन – महात्मा गांधी
महात्मा गांधी ने लंदन से बैरिस्टर की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद वे दक्षिण अफ्रीका गए, जहाँ उन्होंने रंगभेद के खिलाफ पहली बार सत्याग्रह का प्रयोग किया। भारत लौटने के बाद उन्होंने चंपारण सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और दांडी मार्च जैसे ऐतिहासिक आंदोलनों का नेतृत्व किया।
हालाँकि उनकी जाति वैश्य थी, लेकिन उनके विचार और कर्म उन्हें हर वर्ग, हर जाति और हर धर्म के लोगों से जोड़ते हैं।
महात्मा गांधी का समाज पर प्रभाव
आज के समय में GK Quiz, Sarkari Naukri Exam, और School–College Exams में महात्मा गांधी से जुड़े प्रश्न सबसे अधिक पूछे जाते हैं। उनकी जाति से जुड़ी जानकारी केवल ऐतिहासिक और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि गांधी जी ने स्वयं कभी भी जातिगत पहचान को प्राथमिकता नहीं दी।
उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के कमजोर और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। चरखा, खादी और स्वदेशी आंदोलन के माध्यम से उन्होंने आत्मनिर्भर भारत की नींव रखी। गांधी जी का स्पष्ट मानना था कि जब तक समाज से जातिगत भेदभाव समाप्त नहीं होगा, तब तक देश की सच्ची प्रगति संभव नहीं है।
इन्हीं महान विचारों और कार्यों के कारण महात्मा गांधी आज भी भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में शांति, सत्य और अहिंसा के प्रतीक माने जाते हैं।







