हिसार, 30 जून।
आजाद नगर स्थित भाग्यश्री आश्रम में मंगलवार को एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन सेवानिवृत्त डीआईपीआरओ एवं नामदेव ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन स्व. आर.एस. वर्मा की 11वीं पुण्यतिथि के अवसर पर किया गया।इस अवसर पर उनके पुत्र श्री वीरेन्द्र वर्मा सेवानिवृत्त डीआईपीआरओ एवं नामदेव सभा के उपप्रधान), पौत्र अजय वर्मा एडवोकेट, धर्मपत्नी श्रीमती गायत्री वर्मा तथा मीनाक्षी वर्मा ने मिलकर बेसहारा महिलाओं को भोजन करवाया। भोजन वितरण का यह कार्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी और करुणा का जीवंत उदाहरण रहा।स्व. वर्मा जी अपने जीवनकाल में समाज सेवा और जनहित के कार्यों के लिए जाने जाते थे। उनका व्यक्तित्व अनुशासन, ईमानदारी और सेवा भाव का प्रतीक था। उन्होंने समाज को एकजुट करने और युवाओं को शिक्षा के प्रति प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जनसंपर्क विभाग में रहते हुए उन्होंने जनता और प्रशासन के बीच संवाद को मजबूत किया। उनकी कार्यशैली पारदर्शिता और जनहित पर आधारित रही, जिसके कारण वे पूरे समाज में सम्मानित और प्रिय बने।सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने समाज सेवा को अपना जीवन उद्देश्य बनाया। नामदेव ट्रस्ट के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके प्रयासों से समाज में शिक्षा का स्तर ऊँचा हुआ और अनेक जरूरतमंद परिवारों को सहयोग मिला। उनका जीवन सत्य, सेवा और मानवता को सर्वोपरि रखने वाला रहा, जो आज भी समाज को प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर श्री वीरेन्द्र वर्मा ने कहा कि उनके पिता ने उन्हें सिखाया कि सच्ची श्रद्धांजलि फूलों और दीपों से नहीं, बल्कि सेवा और सहयोग से दी जाती है। अजय वर्मा ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि समाज के वंचित वर्गों की सहायता करना ही उनके दादा को सच्ची श्रद्धांजलि है। धर्मपत्नी श्रीमती गायत्री वर्मा और बेटी मीनाक्षी वर्मा ने महिलाओं को भोजन परोसते हुए भावुकता से कहा कि परिवार के सभी सदस्य मिलकर समाज सेवा की इस परंपरा को आगे बढ़ाते रहेंगे।
आश्रम की संचालिका बाला देवी ने इस पहल की सराहना की और वर्मा परिवार को धन्यवाद दिया। उपस्थित समाजसेवियों और नामदेव सभा के सदस्यों ने भी स्व. वर्मा जी के योगदान को याद किया और उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया।इस प्रकार, स्व. आर.एस. वर्मा की पुण्यतिथि पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं रहा, बल्कि समाज सेवा की भावना को प्रोत्साहित करने वाला एक प्रेरणादायी संदेश भी बन गया। वर्मा परिवार की इस पहल ने यह स्पष्ट किया कि सच्ची श्रद्धांजलि वही है, जिसमें हम अपने पूर्वजों के आदर्शों को कर्म के रूप में आगे बढ़ाएं और समाज के कमजोर वर्गों के जीवन में आशा और सम्मान का संचार करें।





