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जब 21 पंथों के संत एक मंच पर आए… अग्रोहा धाम बना भारत की आत्मा का सजीव स्वर

On: July 2, 2026 4:42 PM
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अग्रोहा।

कुछ दृश्य केवल देखे नहीं जाते, वे इतिहास की स्मृतियों में अंकित हो जाते हैं। कुछ क्षण केवल बीतते नहीं, वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन जाते हैं। अग्रोहा धाम में ऐसा ही एक अलौकिक दृश्य साकार हुआ, जब 21 पंथ-परम्पराओं के पूज्य संत-महात्मा एक ही मंच पर विराजमान हुए। अलग-अलग वेश, अलग-अलग साधना परम्पराएँ, अलग-अलग अखाड़े—लेकिन हृदय में एक ही संकल्प—”समरस भारत, समर्थ भारत।”

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सामाजिक समरसता गतिविधि के तत्वावधान में आयोजित यह ऐतिहासिक संत समागम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था; यह भारतीय संस्कृति की उस जीवंत चेतना का उत्सव था, जो सदियों से समाज को जोड़ती आई है। माँ भगवती के पूजन, भारत माता के वंदन और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ जैसे ही कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और राष्ट्रभक्ति से आलोकित हो उठा।

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मुख्य वक्ता एवं सामाजिक समरसता गतिविधि के क्षेत्र संयोजक प्रमोद कुमार ने कहा कि समाज को तोड़ने वाली शक्तियाँ तभी पराजित होंगी, जब समाज को जोड़ने वाली संत परम्परा सशक्त होगी। उन्होंने धर्मांतरण, जातीय वैमनस्य और सामाजिक विघटन जैसी चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि समरसता केवल एक विचार नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। यही आत्मा भारत को विश्वगुरु बनने की शक्ति देती है।

प्रांत धर्माचार्य संपर्क प्रमुख डॉ. योगी अनूप नाथ ने संत समाज का आह्वान करते हुए कहा कि आज समय मठों और आश्रमों तक सीमित रहने का नहीं, बल्कि समाज के बीच उतरकर राष्ट्रचेतना जगाने का है। उन्होंने सभी संत-महात्माओं से आग्रह किया कि वे गाँव-गाँव, नगर-नगर जाकर सामाजिक समरसता, सेवा, सद्भाव और राष्ट्रभक्ति का संदेश फैलाएँ तथा छुआछूत, जातीय भेदभाव और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जन-जागरण का अभियान चलाएँ। उन्होंने कहा कि संत वहीं सफल है, जिसकी वाणी से समाज में प्रेम बढ़े और राष्ट्र मजबूत हो।

सम्मेलन की सबसे प्रेरक झलक तब सामने आई, जब नाथ पंथ, दशनामी संप्रदाय, जूना अखाड़ा, आनंद अखाड़ा, उदासीन संप्रदाय, कबीर पंथ, रविदास पंथ, सिख निहंग परम्परा, वाल्मीकि परम्परा सहित 21 पंथ-परम्पराओं के संत एक स्वर में बोले—”धर्म का उद्देश्य विभाजन नहीं, मानवता का उत्थान है।” यह दृश्य स्वयं में सामाजिक समरसता का जीवंत संदेश बन गया।

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संत-महात्माओं ने सामाजिक समरसता, नशामुक्ति, छुआछूत उन्मूलन, गौसंवर्धन, सनातन संस्कृति के संरक्षण और राष्ट्र निर्माण के लिए संयुक्त रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।

विभाग सह संयोजक डॉ. सुखबीर सिंह ने बताया कि बैठक में सामाजिक समरसता को जन-आंदोलन बनाने और संत समाज के मार्गदर्शन में समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचने की आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम के अंत में विभाग संघचालक पवन कुमार ने सभी संत-महात्माओं और अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

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इस अवसर पर प्रांत कार्यवाह प्रताप सिंह, प्रांत सामाजिक समरसता गतिविधि संयोजक ज्ञान चंद जैन, विभाग कार्यवाह कृष्ण कुमार, जिला कार्यवाह सतीश कुमार, डॉ. रामनिवास, सह जिला संघ चालक कृष्ण यादव, प्रदीप शास्त्री, खुशी राम, सरपंच महावीर, कुलदीप सिंह (आदमपुर), खंड संघ चालक शिव कुमार, सोनू, सतपाल सरपंच, महेन्द्र रोहिला, डॉ. विकास सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दायित्ववान कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

जब कार्यक्रम के समापन पर “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” और “हर-हर महादेव” के गगनभेदी जयघोष गूँजे, तो ऐसा लगा मानो अग्रोहा धाम से केवल स्वर नहीं, बल्कि एक नया संकल्प पूरे राष्ट्र की ओर प्रस्थान कर रहा हो—समरस समाज ही समर्थ राष्ट्र का आधार है, और संत परम्परा ही उस आधार की शाश्वत शक्ति।

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