चंडीगढ़, 24 जून – चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने प्रदेश में निर्माणाधीन आठ सरकारी मेडिकल कॉलेजों की प्रगति की समीक्षा करते हुए पीजीआईएमएस रोहतक में कैंसर उपचार सुविधाओं को मजबूत करने के लिए ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) द्वारा किए जा रहे महत्वपूर्ण सीएसआर सहयोग की जानकारी दी।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि ओएनजीसी ने पीजीआईएमएस रोहतक में उन्नत कैंसर उपचार अवसंरचना विकसित करने के लिए लगभग 39 करोड़ रुपये की सीएसआर सहायता प्रदान की है। उन्होंने इसे हरियाणा की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में सस्ती और आधुनिक कैंसर देखभाल को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
उन्होंने बताया कि सीएसआर पहल के तहत ओएनजीसी ने संस्थान के रेडियोथेरेपी विभाग को लगभग 10 करोड़ रुपये मूल्य का सीटी सिम्युलेटर उपलब्ध कराया है। इसके अलावा, करीब 39 करोड़ रुपये की लागत वाली लीनियर एक्सेलेरेटर परियोजना के लिए पहली किस्त भी जारी कर दी गई है। डॉ. मिश्रा आज यहां मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च की मॉनिटरिंग एंड सुपरवाइजरी कमेटी (MSMER) की 31वीं बैठक की अध्यक्षता कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि सीटी सिम्युलेटर और लीनियर एक्सेलेरेटर की स्थापना से संस्थान की कैंसर रोगियों के लिए सटीक निदान, उपचार योजना और रेडिएशन थेरेपी प्रदान करने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इन अत्याधुनिक उपकरणों से पीजीआईएमएस रोहतक प्रमुख विशेषीकृत कैंसर केंद्रों के समान स्तर की सेवाएं प्रदान करने में सक्षम होगा।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि इस पहल से हरियाणा और पड़ोसी राज्यों के हजारों मरीजों को लाभ मिलेगा, जो सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं के लिए संस्थान पर निर्भर हैं।
बैठक के दौरान उन्होंने कैथल, यमुनानगर, जींद, सिरसा, करनाल, सोनीपत, भिवानी और कोरियावास में विकसित किए जा रहे सरकारी मेडिकल कॉलेजों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। समीक्षा में निर्माण कार्य, चिकित्सा उपकरणों की खरीद, फैकल्टी भर्ती, उपयोगिता सेवाओं, आवासीय सुविधाओं तथा राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से अनुमोदन की तैयारियों पर चर्चा की गई।
बैठक की प्रमुख उपलब्धियों में यह तथ्य शामिल रहा कि कैथल और यमुनानगर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों का निर्माण कार्य 80 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है, जिससे वे हरियाणा के मेडिकल शिक्षा विस्तार कार्यक्रम की अग्रणी परियोजनाओं में शामिल हो गए हैं।
डॉ. मिश्रा ने सभी कार्यान्वयन एजेंसियों को निर्देश दिए कि उपयोगिता कनेक्शन, उपकरण खरीद, फैकल्टी नियुक्तियां और वैधानिक स्वीकृतियों सहित सभी लंबित कार्य समयबद्ध ढंग से पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि एनएमसी निरीक्षण और अनुमोदन से पूर्व सभी संस्थान पूर्ण रूप से तैयार होने चाहिए।
उन्होंने आवासीय परिसर, कैंपस अवसंरचना और अन्य सहायक सुविधाओं की स्थिति की भी समीक्षा की तथा निर्देश दिए कि इनका निर्माण शैक्षणिक और अस्पताल भवनों के साथ-साथ पूरा किया जाए।
उन्होंने कहा कि ये दोनों पहलें हरियाणा में विशेषीकृत स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा अवसंरचना को एक साथ मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगी। जहां ओएनजीसी समर्थित कैंसर देखभाल परियोजना से पीजीआईएमएस रोहतक में ऑन्कोलॉजी सेवाओं को मजबूती मिलेगी, वहीं आगामी मेडिकल कॉलेज एमबीबीएस शिक्षा क्षमता बढ़ाने और पिछड़े क्षेत्रों में तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर बनाने में सहायक होंगे। अधिकारियों के अनुसार, इन परियोजनाओं से मौजूदा स्वास्थ्य संस्थानों पर दबाव कम होगा तथा प्रदेश के लोगों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और उपचार सुविधाएं उनके निकट उपलब्ध हो सकेंगी।





