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नई ट्रांसफर पॉलिसी तैयार कर ट्रांसफर ड्राइव शुरू करने की मांग

On: May 27, 2026 9:58 PM
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रोहतक, 27 मई। हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन ने राज्य सरकार से मांग की है कि माननीय न्यायालय के निर्देशों के अनुसार जल्द नई ट्रांसफर पॉलिसी तैयार कर ट्रांसफर ड्राइव शुरू करनी चाहिए, ताकि गर्मी की छुट्टियों के समाप्त होने से पहले स्कूलों में अध्यापकों की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। एसोसिएशन के राज्य सचिव संदीप खोखर ने बुधवार को यहां जारी बयान में कहा कि लंबे समय से लंबित तबादलों के कारण शिक्षकों में भारी असंतोष है तथा विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।

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उन्होंने बताया कि हरियाणा में वर्ष 2014 में भाजपा सरकार बनने के बाद शिक्षा विभाग में अध्यापकों की तबादला नीति को ऑनलाइन करने का निर्णय लिया गया था। उस समय शिक्षकों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम माना था। शुरुआती वर्षों में ऑनलाइन ट्रांसफर नीति के सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिले, लेकिन समय बीतने के साथ यही नीति अब शिक्षकों के लिए अनेक समस्याओं का कारण बनती जा रही है।

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हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन के राज्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में बड़ी संख्या में पी.जी.टी. अध्यापक प्रमोट होकर प्रिंसिपल बन चुके हैं, लेकिन उनके स्थान पर नए शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से अनेक पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इसका सीधा प्रभाव विद्यालयों की शिक्षण व्यवस्था पर पड़ रहा है तथा विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई विद्यालय ऐसे हैं जहां महत्वपूर्ण विषयों के अध्यापक उपलब्ध नहीं हैं, जबकि कुछ विद्यालयों में आवश्यकता से अधिक स्टाफ मौजूद है। उन्होंने कहा कि तबादला प्रक्रिया प्रत्येक वर्ष निर्धारित समय पर पूरी की जानी चाहिए थी ताकि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले स्कूलों में स्टाफ का संतुलन बनाया जा सके। शिक्षा विभाग ने जनवरी माह में तबादलों की प्रक्रिया शुरू करते हुए 31 मार्च तक ट्रांसफर ड्राइव पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन मामला न्यायालय में लंबित होने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब 21 मई को माननीय न्यायालय द्वारा ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को दोबारा तैयार करने के निर्देश जारी किए गए हैं, जिसके चलते शिक्षकों को तबादलों के लिए और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। वर्ष 2016 में पहली बार ऑनलाइन तबादले लागू किए गए थे, जिसमें जे.बी.टी. से लेकर पी.जी.टी. तक सभी वर्गों के अध्यापकों के तबादले बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के किए गए। इसके बाद वर्ष 2017 से 2019 तक भी नियमित रूप से तबादले होते रहे। हालांकि वर्ष 2020 और 2021 में यह प्रक्रिया बाधित हो गई और लंबे समय तक तबादले नहीं हो सके। अगस्त 2022 में शिक्षा विभाग द्वारा लागू की गई नई ऑनलाइन व्यवस्था के बाद अनेक विसंगतियां सामने आईं। वरिष्ठ अध्यापकों को दूरदराज क्षेत्रों में भेजे जाने तथा नए अध्यापकों को मनपसंद स्टेशन मिलने जैसी शिकायतें लगातार उठती रहीं। कई विद्यालयों में एक ही विषय के अध्यापकों की संख्या अधिक हो गई, जबकि अनेक स्कूल विषय विशेषज्ञ अध्यापकों से वंचित रह गए। दिसंबर 2022 में हजारों शिक्षकों को प्रतिनियुक्ति के आधार पर खाली पदों पर भेजा गया था, जो व्यवस्था आज तक जारी है। जनवरी 2023 में नई स्थानांतरण नीति लागू करने की घोषणा की गई, लेकिन वर्ष 2023 और 2024 में भी विभाग तबादले करवाने में सफल नहीं हो पाया। इसके बाद नवंबर 2025 में नई ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी तैयार की गई और उसके आधार पर प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन मामला पुनः न्यायालय में लंबित होने के कारण इस वर्ष भी तबादले नहीं हो सके।

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