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एडवोकेट ने प्रदेश सरकार को लिखकरआधिकारिक स्पष्टीकरण और सार्वजनिक प्रगटीकरण की अपील की

On: June 27, 2026 2:08 PM
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चंडीगढ़ – गत माह 17 मई 2026 को पंचकूला के  तत्कालीन पुलिस कमिश्नर (आयुक्त) और 1999 बैच के आई.पी.एस. अधिकारी  शिबाश कबिराज ( जो अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक – ए.डी.जी.पी.) रैंक में हैं का तबादला गुरुग्राम पुलिस आयुक्त के तौर पर  कर दिया गया था हालांकि  एक महीने से ऊपर का समय  बीत जाने के बावजूद आज तक न तो  पंचकूला के  नए  पुलिस आयुक्त की नियमित नियुक्ति/तैनाती सम्बन्धी कोई आधिकारिक आदेश सार्वजनिक हुआ है और न ही किसी वरिष्ठ आई.पी.एस.  अधिकारी को उक्त पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपे जाने बारे कोई  आदेश सामने आया है.

बहरहाल, मामले को और उलझाने वाली बात यह है कि पंचकूला पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर आई.पी.एस. पंकज नैन को पुलिस कमिश्नर  दर्शाया जा रहा है. गत एक माह से  पंचकूला पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्तियों में भी पुलिस आयुक्त के तौर पर उनके नाम का उल्लेख किया जा रहा है.

इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने गत दिनों प्रदेश के  राज्यपालमुख्यमंत्रीगृह सचिव और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों  को विस्तृत ज्ञापन-सह-जनहित अपील भेजकर पंचकूला के मौजूदा पुलिस आयुक्त बारे व्याप्त भ्रम की स्थिति के  आधिकारिक स्पष्टीकरण और सार्वजनिक प्रगटीकरण की अपील की है.  

शुक्रवार 26 जून हरियाणा सरकार के गृह विभाग द्वारा 15 आई.पी.एस. अधिकारियों के सम्बन्ध में जारी ताज़ा तैनाती-तबादले आदेश में पंचकूला पुलिस कमिश्नर के पद पर नियमित अथवा अंतरिम तौर पर किसी वरिष्ठ आई.पी.एस. अधिकारी को तैनात करने का  उल्लेख नहीं किया गया.    

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सनद रहे कि पंकज नैन पिछले तीन वर्षों से हरियाणा के  मुख्यमंत्री कार्यालय में स्पेशल ऑफिसर (कम्युनिटी पुलिसिंग एंड आउटरीच) के तौर पर  कार्यरत हैं. इसके अतिरिक्त उनके    पास आई.जी.पी. (सिक्योरिटी)सी.आई.डी. का पहला अतिरिक्त कार्यभार  तथा आई.जी.पी.अंबाला रेंज का  दूसरा एडिशनल चार्ज   है.

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पंकज नैन को  विधिवत सरकारी आदेश द्वारा पंचकूला पुलिस आयुक्त के तौर पर तीसरा  अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया हैअथवा वे केवल “लिंक ऑफिसर” के रूप में उक्त पद का  कार्यभार  देख रहे हैं ?

ज्ञापन में उल्लेख किया  गया है कि यदि पंकज नैन को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है तो उसका सरकारी आदेश सार्वजनिक होना चाहिए और यदि वे केवल अंबाला रेंज के आई.जी. (पुलिस महानिरीक्षक)  होने के नाते लिंक ऑफिसर के तौर पर  अस्थायी रूप से पंचकूला पुलिस आयुक्त का  कार्यभार  देख रहे हैंतो गृह विभाग द्वारा  इस प्रकार की लिंक ऑफिसर  व्यवस्था सम्बंधित जारी सरकारी आदेश का  सार्वजनिक प्रगटीकरण किया जाना चाहिए.

एडवोकेट हेमंत, जो मूल रूप से अम्बाला जिला के निवासी है, ने अपने ज्ञापन में प्रदेश के गृह विभाग द्वारा पूर्व में जारी एक  आदेश   का हवाला देते हुए लिखा कि करीब तीन वर्ष पूर्व अगस्त, 2023 में जब तत्कालीन अंबाला रेंज के आई.जी.  सिबाश कबिराज को पंचकूला पुलिस आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार दिया गया थातब गृह विभाग द्वारा  बाकायदा जारी औपचारिक सरकारी आदेश में इस सम्बन्ध में स्पष्ट उल्लेख किया गया था.  तब ऐसी  व्यवस्था करीब  15 महीने तक प्रभावी रही थी.

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ज्ञापन में लिखा  गया है कि यह केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति का मामला नहीं है. हरियाणा पुलिस अधिनियम, 2007 की धारा 8 एवं  18 अक्टूबर 2016 को हरियाणा के गृह विभाग द्वारा प्रकाशित एक   अधिसूचना के तहत पंचकूला पुलिस आयुक्त को कानून-व्यवस्थानिषेधात्मक कार्रवाई और कार्यपालिका संबंधी अनेक महत्वपूर्ण वैधानिक अधिकार/शक्तियां  तत्कालीन लागू दंड  प्रक्रिया संहिता (सी.आर.पी.सी.), 1973 में प्रदान किये गये थे.  

 जुलाई 2024 से सी.आर.पी.सी., 1973 के स्थान पर लागू भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के बाद भी ये शक्तियां प्रभावी हैं।

ऐसे में नागरिकों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि इन महत्वपूर्ण वैधानिक शक्तियों का प्रयोग वर्तमान में कौन अधिकारी और किस कानूनी अधिकार के तहत कर रहा है।

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ज्ञापन में हरियाणा सरकार से आग्रह किया गया है कि

स्पष्ट किया जाए कि क्या आईपीएस पंकज नैन को विधिवत पंचकूला पुलिस आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

यदि ऐसा आदेश मौजूद है तो उसे तत्काल सार्वजनिक किया जाए।

यदि वे केवल लिंक ऑफिसर अर्थात  किसी अंतरिम व्यवस्था के तहत कार्य कर रहे हैंतो उस व्यवस्था का कानूनी आधार और संबंधित सरकारी आदेश भी सार्वजनिक किया जाए।

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कानून का राज पारदर्शिता से ही मजबूत होता है

हेमंत ने कहा कि प्रशासनिक पारदर्शिता केवल सुशासन का सिद्धांत नहीं, बल्कि कानून के शासन की मूल आवश्यकता है। पंचकूला पुलिस आयुक्त के पद पर वैधानिक रूप से कौन कार्यरत है, इसकी सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध कराने से न केवल भ्रम समाप्त होगा बल्कि शासन की जवाबदेही और नागरिकों का विश्वास भी मजबूत होगा

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